मुंह की उचित स्‍वच्‍छता के लिए विशेषज्ञ की राय
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मुंह की उचित स्‍वच्‍छता के लिए विशेषज्ञ की राय

फ़िटनेस
Namrata Rupani
3 min read

मुंह की उचित स्‍वच्‍छता के लिए विशेषज्ञ की राय

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मुंह की स्वच्छता का अर्थ नियमित रूप से अपने मुंह की गुहा की सफाई करना है जो दांतों और इसके आस-पास की संरचनाओं के समुचित कार्य करने के लिए आवश्यक है।

यह रखरखाव का अभ्यास है जो हमारे मुंह, दांत, मसूड़े, जीभ और कोमल ऊतकों को किसी भी बीमारी से मुक्त रखता है। पीरियडोंटल बीमारियों,बदबूदार सांस, दंत क्षय और दांत की अन्‍य समस्याओं की रोकथाम के लिए मुंह की उचित स्वच्छता महत्वपूर्ण होती है।

इसमें ऐसे उपाय भी शामिल हैं जो संक्रमण को मुंह की गुहा से शरीर में फैलने से रोकते हैं। कहा गया है कि रोकथाम इलाज से बेहतर होता है, और मुंह को लेकर उचित आदतें अपनाना, अधिकांश दंत समस्याओं और उनके उपचार को आपसे दूर रखती है।

मुंह की उचित स्‍वच्‍छता कैसे सुनिश्चित करें?

नीचे कुछ उपाय दिये गये हैं, जिन्हें मुंह की उचित स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए इस्‍तेमाल करना चाहिए:
  • दिन में दो बार ब्रश करें, खासकर रात को सोने से पहले और रोजाना एक बार फ्लॉस करें।
  • स्वस्थ, संतुलित आहार लें और भोजन के बीच स्नैक्स का सेवन कम करें।
  • फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का प्रयोग करें।
  • फ्लोराइड युक्त माउथवॉश से कुल्‍ला करें।
ब्रश करने की बुनियादी तकनीक



दांतों को अच्छी तरह से ब्रश करने के लिए नीचे दिये गये उपायों का पालन करना चाहिए:
  • ब्रश को इस तरह झुकाएं, ताकि वह गम लाइन यानी मसूड़ों की सीधी रेखा से 45-डिग्री पर हो और 'ऊपर और नीचे' की गति में ब्रश चलायें। हमारे दांतों के खांचे लंबवत होते हैं और इसलिए क्षैतिज स्क्रबिंग को छोड़ देना चाहिए और दांतों को साफ करते समय ब्रश की ऊर्ध्वाधर गति पर ध्‍यान देना चाहिए।
  • सामने और पीछे की ओर छोटे-छोटे स्ट्रोक लगाते हुए प्रत्येक दांत की आंतरिक, बाहरी और चबाने वाली सतहों पर धीरे-धीरे ब्रश चलायें।
  • जल्दबाज़ी में ब्रश न करें। शुरू से अंत तक लगभग दो मिनट अच्छी और पूरी सफाई होनी चाहिए।
  • हर बार टूथब्रश का उपयोग करने के बाद उसे अच्छी तरह से धोयें और टूथब्रश को खड़ी अवस्‍था में रखें ताकि यह फिर से उपयोग करने तक हवा में सूख जाये।
  • टूथब्रश को कवर न करें या उन्हें बंद कंटेनर में न रखें क्योंकि इससे खमीर, मोल्ड और बैक्टीरिया पनपने की संभाना बढ़ जाती है।
  • ब्रिसल्स यानी ब्रश के बालों के घिस जाने पर या खराब हो जाने पर टूथब्रश को बदल दें।
  • सर्दी से पीड़ित होने के बाद टूथब्रश बदल दें, क्योंकि टूथब्रश के ब्रिसल्स में कीटाणु जमा हो सकते हैं जो फिर से संक्रमण कर सकते हैं।
  • एक टूथब्रश को लगभग तीन से चार महीने तक इस्तेमाल किया जाना चाहिए और फिर बदल दिया जाना चाहिए।
जीभ की सफाई



यहां नीचे जीभ की सफाई के बारे में विशेषज्ञ के कुछ सुझाव दिए गए हैं:
  • कई जीवाणु सामान्य रूप से जीभ के ऊपर पाए जाते हैं। इन बैक्टीरिया और जीभ पर फंसे अन्य अवशेषों के कारण सांस में बदबू आ सकती है। बैक्टीरिया को दूर करने और सांस को ताजा करने के लिए जीभ पर धीरे-धीरे ब्रश करें।
  • जीभ पर जमे अवशेषों को हटाने के लिए टंग क्लीनर या टूथब्रश का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इंटरडेंटल ब्रश का उपयोग करना

निम्‍नलिखित कारणों की वजह से आपको इंटरडेंटल ब्रश यानी दांतों के बीच सफाई करने वाले ब्रश का उपयोग करना चाहिए:
  • एक सामान्य टूथब्रश दांतों के बीच नहीं पहुंच सकता है, और इसलिए हमारे दांतों पर जमा प्‍लेक यानी मैल को 100% को साफ नहीं कर सकता है। इसलिए इंटरडेंटल ब्रश को फ्लॉसिंग की तरह दांतों की सतहों के बीच में साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
फ्लॉसिंग



फ़्लॉसिंग के निम्‍नलिखित लाभ होते हैं:
  • फ्लॉसिंग गम लाइन के नीचे और दांतों की तंग जगहों मे जमी मैल और अवशेषों को हटाने के लिए डेंटल फ्लॉस का उपयोग करने की एक विधि है।
  • दांतों के बीच डेंटल फ्लॉस धीरे से डाला जाता है और इसे दांतों के किनारे और गम लाइन पर खुरचते हुए चलाया जाता है।
  • दांतों में ब्रश करने के साथ फ्लॉसिंग करने से हैलिटोसिस (सांसों की दुर्गंध), मसूड़ों की बीमारी और डेंटल कैरीज को रोकने में सहायता मिलती है।
फ्लॉसिंग तकनीक

नीचे फ्लॉसिंग के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका दी गई है:

 18 इंच (40 सेंटीमीटर) लंबे फ्लॉस का उपयोग करें, जिसमें से एक या दो इंच काम करने के लिए हाथ में रखें।
  • एक हाथ पर मध्यमा उंगली के चारों ओर फ्लॉस को लपेट लें, और शेष भाग को दूसरे हाथ की मध्यमा उंगली के चारों ओर लपेट लें। अब फ्लॉस को आगे की उंगलियों और अंगूठे के बीच मजबूती से पकड़ें।
  • दो दांतों के बीच फ्लॉस को रगड़ते हुए डालें। जब फ्लॉस गम लाइन तक पहुंचता है, तो अंग्रेजी अक्षर ‘सी’ का आकार बनाते हुए उसे दांत के विपरीत मोडें।
  • धीरे-धीरे अपने दांतों की वक्रता के अनुसार चलें।
  • इसे सभी दांतों के साथ दोहराएं।
 माउथवाश

दैनिक ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के अलावा, अपने मुंह के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए फ्लोराइड युक्त माउथवॉश का उपयोग करें।

यहां बताया गया है कि आप मुंह की अच्‍छी स्वच्छता का आनंद लेने के लिए क्या कर सकते हैं: 
  • टूथपिक्स या अन्य वस्तुओं का उपयोग करने से बचने का प्रयास करें: इनका उपयोग करने से आपके मसूड़ों को चोट पहुंच सकती है, और मुलायम ऊतकों को लगने वाली चोट बैक्टीरिया और संक्रमण को जन्म दे सकती है।
  • चिपचिपे खाद्य पदार्थों से बचें: चिपकने वाले खाद्य पदार्थ आपके दांतों में अधिक समय तक अटके रहते हैं, और इसलिए दांतों में क्षय होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए कुरकुरे फल और सब्जियां ही आपके मुंह की गुहा को स्वस्थ रखने वाले आहार हैं।
  • खट्टे फलों के रस, सिरका और सोडा/गैस वाले पेय से बचें: खट्टे फलों के रस, सिरका और सोडा/गैस वाले पेय में एसिड होता है, इसलिए वे मुंह की गुहा के पीएच स्तर को कम कर देते हैं, जिससे गुहा अधिक अम्लीय हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप इनेमल का डिमिनेरलाइजेशन होता है। दांतों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए ऐसे पेय से बचना चाहिए।
  • धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन बंद करें: धूम्रपान और तम्बाकू के सेवन से मसूड़ों के रोग और दांत खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। धूम्रपान से मुंह सूख जाता है जिससे दांत सड़ जाते हैं। धूम्रपान करने वालों को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे दांत पीले पड़ते हैं और सांसों से बदबू भी आती है। इसलिए धूम्रपान और तंबाकू का सेवन छोड़ देना चाहिए।
  • शराब का सेवन करने से बचें: अधिक मात्रा में शराब के सेवन करने से मुंह सूखता है। मुंह में मौजूद लार जीवाणुओं द्वारा उत्पादित एसिड को बेअसर करने में मदद करती है, बैक्टीरिया के विकास को कम करती है और दांतों से चिपके भोजन को भी धोती है। लार की अनुपस्थिति या कमी से, प्‍लेक जमाव और दंत कैरीज में वृद्धि होती है।
डेंटिस्‍ट के पास कब जायें?



मसूड़ों की बीमारियों और मुंह के स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित अन्‍य समस्याओं को रोकने के लिए, हर 6 महीने में अपने दांतों की जांच करायें। इस बीच अगर आपको निम्नलिखित कोई भी लक्षण नजर आये, तो डेंटिस्‍ट से जरूर मिलें:
  • सूज गये, नरम पड़े/दर्द करते लाल मसूड़े
  • मसूड़ों से खून आना
  • ब्रश करते समय रक्तस्राव
  • दांतों से मसूड़े अलग होना
  • स्थायी दांतों में गतिशीलता
  • गर्म और ठंडे खाद्य पदार्थों/पेय के प्रति असामान्य संवेदनशीलता
  • हैलिटोसिस यानी मुंह में दुर्गंध या असामान्य स्वाद
  • चबाते समय दर्द होना 
मुंह की स्‍वच्‍छता और शारीरिक बीमारियों के बीच क्या संबंध है?

मुंह के रोग और सूजन (मुंह की बैक्टीरिया और मुंह में संक्रमण) गंभीर शारीरिक बीमारियों के लिए जोखिम साबित हो सकते हैं, जैसे:
  • बैक्टीरियल निमोनिया
  • जन्‍म के समय शिशु का अत्यधिक वजन या कम वजन होना
  • हृदय रोग (दिल का दौरा और स्ट्रोक)
  • मधुमेह-संबंधी जटिलताएं
  • ऑस्टियोपोरोसिस 
निष्कर्ष 

अपने मसूड़ों, दांतों और मुंह से जुड़ी किसी भी समस्या का शीघ्र पता लगाने और हस्तक्षेप करने से मुंह के उचित स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। हर चमकदार, स्वस्थ और सुंदर मुस्कान के पीछे मजबूत दांत और उचित दंत स्वच्छता और देखभाल होती है। हालांकि जब तक दांतों और मसूड़ों का ध्यान रखा जाता है, तब तक ही स्वस्थ मुस्कान बनी रहती है। जब हम मुंह की स्वच्छता पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, तो हम दांतों की समस्‍याओं का सामना करना शुरू कर देते हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी पूरी सेहत पर असर डालती हैं।

डॉ. नम्रता रूपानी डेंटल सर्जन हैं। वह हेल्थहंट की स्वास्थ्य परिषद की सदस्य भी हैं।

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